बालको के गड्ढे में सड़क जिंदगी और मौत से लड़ती हुई जनता मंत्री इसे बालकों का चाहू ओर विकास कह रहे हैं
ब्यूरो प्रमुख कोरबा
बालको कोरबा ,, 18/08/2026/// >>> बालक मैनेजमेंट के लिए यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि जब सैया भाई कोतवाल तो फिर डर कहे का | बालको ने प्लांट के आसपास रहने वालों का जीवन नर्क बना दिया है एक और जंहा प्रदूषण की मार से बच्चे सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं
वही सड़कों पर चलने वाले वयस्क भारी भरकम डंपरों के नीचे आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं मंत्री लखन लाल देवांगन खुलेआम मंच से कह रहे हैं की बालको चंहु और विकास का कार्य कर रहा है
रखाड की चासनी में डूबे तमाम जनप्रतिनिधियों को बालको की जनता का दर्द दिखाई ही नहीं देता हे बालको की जनता प्रदूषण और भारी भरकम सड़क के गढ़ों में जिस तरीके से अपना जीवन समाप्त कर रही हैं वह किसी को दिख ही नहीं रहा है जिला प्रशासन को तो बिल्कुल भी नहीं दिख रहा हे उन पर इतना राजनीतिक दबाव है कि वह बालकों की तरफ देखते ही नहीं रहे हें की बालको क्या कर रहा है वहां के रहने वालों की क्या स्थिति है उनका कहीं कोई खेर ख्वाह लेने वाला नहीं हे
बालको के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधि और वहां की जनता ने इतनी शिकायत की है कि अगर उन सब में प्रशासन 10% भी अपनी जिम्मेदारी समझ कर एक्शन लेता तो आज बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ सारी शिकायतें डंप पड़ी है सब दिख रहा है लेकिन सब धृतराष्ट्र बने हें
बालको का ब्रेड बटर मानव की जिंदगी से ज्यादा भारी दिखाई दे रहा जिस तरीके से इतनी अनियमितताओं के बावजूद ना तो मंत्री बोल रहे हैं ना जिला प्रशासन बोल रहा है उसे साफ मतलब है की बालको इंन जन सेवकों को भी रखाड और कोयले की चासनी में डुबाया हुआ है


