बालको ट्रांसपोर्टे का खेला गब्बर सिंह टैक्स चूकाओ ट्रांसपोर्टे का काम पाओ
मंत्री जी कहते हैं कि बालको कर रहा है क्षेत्र का चहुंमुखी विकास: लखन लाल देवांगन
कोरबा /// बालकों की नैतिक जिम्मेदारी है कि जिन सड़क का वह उपयोग कर रहा हैं उनका माकूल तरीके से रखरखाव कर आम जनता को तकलीफ ना हो यह बालकों की जिम्मेदारी है लेकिन देखने में पाया गया है कि ऐसा नहीं हो रहा है आए दिन नागरिक वकील डॉक्टर और आम जन भारी-भारी डंपरों के चाको के नीचे अपनी जान दे रहे चलने लायक रोड नहीं है रोड है ही नहीं है
लेकिन मंत्री जी कहते हैं की बालको चहुंमुखी विकास कर रहा है अब यह विकास मंत्री जी किस चश्मे से देख रहे हैं और क्यों उन्हें यह असलियत नहीं दिख रही है इसका खुलासा हम आगे करने वाले है आरटीओ के नियम अनुसार 20 टन लोड की गाड़ियां के हिसाब से को पीडब्ल्यूडी हो या और जो भी सड़क बनाने वाली जिम्मेदारियां कंपनियां है इस माप दंड के हिसाब से सड़क निर्माण करती हें लेकिन बालकों के भारी भरकम डंपर 18चका 10 चका 20 चका के भारी भरकम डंपर 30 से 40 तन का लोड लेकर इन सड़कों पर बेतहाशा स्पीड से दौड़ रहे हैं और डंपरों के चाकों के नीचे आकर आम जनता मर रही है
जब से बालकों के मैनेजमेंट की कमान निजी हाथों में आई है तब से यह लापरवाही मनमानी शुरूढंग से शुरू हो गई है बालक मैनेजमेंट इतना चतुर है कि वह मंत्री, विधायक, महापौर, पार्षद, के अलावा सरकारी अधिकारी कलेक्टर, एसपी, पर्यावरण, और आरटीओ को तरह-तरह से प्रलोभन दे कर साधे रखता है प्रलोभन देने का सिलसिला काफी पुराना है सरकार किसी की भी हो बालकों में ट्रांसपोर्टेशन का काम करना है तो मंत्री चाहिए विधायक चाहिए इनकी रिकमेंडेशन के बगैर बालकों में राखड ढोने का काम कोयला ढोने का काम मिलन और करना नामुमकिन बालको मैनेजमेंट इन्हें इसी तरीके से उपकृत करके रखता है.
जिन कंपनियों को ट्रांसपोर्टेशन का काम वहां मिलता है वह कंपनियां हर महीने मंत्री. विधायक अधिकारी को गब्बर टैक्स पहुंचती रहती बहुत ही इमानदारी से यह काम होता है बाकायदा पूरा काम ओहदे के अनुसार परसेंटेज में बांट दिया जाता है कंपनी के रेट फिक्स है उनमें कोई ऊपर नीचे नहीं होता लेकिन जिन कंपनियों को यह ट्रांसपोर्टेशन करने का
काम मिलता है वह अपने मुनाफे में से अच्छा खासा गब्बर सिंह टैक्स हर महीने ईमानदारी से पहुंचने रहे और उनके भारी-भारी डंपर सड़क पर गरीब जनता को रोंदते हुए ओवरलोडिंग के साथ एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पूरे बालको नगर को धूल धुएं से ढके रहते हैं, मरता क्या नहीं करता वहां का जनमानुष पशु पक्षी जानवर जिंदा लाश की तरह चलते फिर से दिखाई देते और मंत्री जी कहते हैं कि बालको कर रहा है क्षेत्र का चहुंमुखी विकास: लखन लाल देवांगन


