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धर्म-विशेष

भक्त प्रह्लाद की भक्ति और सच्चाई की जीत के रूप में मनाई जाती है होली

**** गोल्ड न्यूज नेट परिवार की ओर से पूरे भारतवंशियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं यह रंगों का त्यौहार है बुराइयों को भूलकर गले मिले गुझियों  की मिठास से जीवन की शुरुआत करें*** 

**** होली है*** मथुरा ,वृंदावन और बरसाना में होली की धूम एक माह पहले से शुरू हो जाती पूरा ब्रज धाम होली के धुन पर नाच गाने  से  श्री कृष्ण राधा  की भक्ति में चूर हो जाता  है कृष्ण द्वापर में अवतरित हुए थे तब से लेकर आज तक करीब 5000 वर्षों से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कृष्ण और कृष्ण की लीलाएं मथुरा वृंदावन बरसाना में जीवित है लोग आज भी उन्हें देखने के लिए ब्रज की होली  शामिल होने के लिए पूरे विश्व से श्रद्धालु ब्रज  धाम पहुंचते हैं तरह-तरह के रंगों में  गुललों में होली के विभिन्न आयाम का लुफ्त उठाते

होली प्रेम से छेड़छाड़ का एक बेहतर सालीकेदार सिलसिला है महिलाएं रंग डालती हैं पुरुष गुलाल उड़ाते हैं फिर फागुन के गीत के सहारे एक दूसरे पर गुलाल  के साथ व्यंग्य के रंग उड़ाते हैं ऐसा कोई वर्ग नहीं है जो इन रंगों से अछूता रह जाता है बड़े हो बूढ़े हो बच्चे हो महिलाएं हो बच्चियों हो सब मिलकर रंग में सराबोर रहते हैं सभी  बसंत ऋतु के इस पावन त्योहार से जीवन का नई दिशा में शुरुआत करते हैं*** 

होली वसन्त ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार हैजो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

 पहले दिन को होलिका जलायी जाती हैजिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिनजिसे प्रमुखतः धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन इसके अन्य नाम हैंलोग एक दूसरे पर रंगअबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैंढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैंगले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।

होली की रात परी साधना का विशेष महत्व हैइसे धन प्राप्ति और संतान पर मौजूद किसी भी शक्ति की सवारी को उतारने के लिए किया जाता है। राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुँचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधेपशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहाँ उनका स्वागत गुझिया,नमकीन व ठंडाई से किया जाता है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य है।